सुश्री दिव्या माथुर के संयोजन में लन्दन स्थित "वातायन--वैश्विक संगोष्ठी" के अंतर्गत साप्ताहिक आधार पर  चल रही ऑनलाइन संगोष्ठियों के क्रम में ७५ वीं संगोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन दिनांक:  २५ सितम्बर २०२१ को  हुआ। श्रृंखलाबद्ध चल रही संगोष्ठियों के क्रम में ७५वीं संगोष्ठी के अवसर पर यह विशेष संगोष्ठी हीरक उत्सव के रूप में आयोजित की गई थी जिसे ख़ास बनाने के लिए हिंदी के प्रख्यात कवियों की गेय रचनाओं को संगीतबद्ध करके, शास्त्रीय सुर-ताल के अनुरूप प्रस्तुत किया गया था। मंच पर इस संगीतबद्ध कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता थे--श्री जोएल और सुश्री चिन्मयी। लेखिका चिन्मयी एवं एडवर्टइजिंग कम्पोज़र-प्रोड्यूसर जोएल, दोनों जहाँ गायक और संगीतकार हैं, वहीं वे साहित्य में भी गहरी रूचि रखते हैं। दोनों ने लगभग दो वर्षों पूर्व साहित्यिक कविताओं को संगीतबद्ध करने से संबंधित 'क्राउड फंडिंग कैम्पेन' नामक एक महती परियोजना का आरंभ भी  किया था जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना की गई है। 'निराला', 'दिनकर', शिवमंगल सिंह 'सुमन', महादेवी वर्मा, 'बच्चन', धर्मवीर भारती जैसे ख्यातिलब्ध  रचनाकार इनके गाए गए गीतों के गीतकार होते हैं। 

इस ७५वें हीरक आयोजन के प्रस्तोता श्री जय विश्वदेवा थे। उल्लेख्य है कि श्री जय विश्वदेवा 'सामा आर्ट्स नेटवर्क' के मुख्य कार्यकारी और कला-निदेशक हैं। मंच पर पद्मश्री पद्मेश गुप्त और 'वातायन' के अन्य सम्मानित सदस्य भी उपस्थित थे। 

सुश्री चिन्मयी एवं श्री जोएल ने वातायन मंच पर महादेवी वर्मा की मशहूर रचना 'चिर सजग आँखें उनींदी' को वायलिन वादन के साथ संगीतबद्ध करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों ने राष्ट्रकवि 'दिनकर' की 'रश्मिरथी' से ली गई एक रचना तथा कबीर की एक पदावली को भी दोतारे पर संगत करते हुए सुरबद्ध करके पेश किया। 

ऑनलाइन मंच पर उपस्थित श्रोताओं, दर्शकों, 'वातायन' मंच के आयोजकों तथा अन्य अतिथियों ने इस कार्यक्रम की भूरि-भूरि सराहना की। इस प्रस्तुति के लिए आवंटित एक घंटे का समय सभी को बहुत छोटा लगा जबकि सभी इस आशा में कार्यक्रम पर टकटकी लगाए बैठे थे कि यह कार्यक्रम अभी और कुछ समय तक चलेगा। 

 

 

 

 

(प्रस्तुति : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र) 

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