सुश्री दिव्या माथुर के संयोजन में लन्दन स्थित "वातायन--वैश्विक संगोष्ठी " के अंतर्गत साप्ताहिक आधार पर ऑनलाइन चल रही ६३वीं गोष्ठी का समापन दिनांक: ३ जुलाई २०२१ को  हुआ। इस संगोष्ठी में तीन युवा कवियों, नामत: अंचित, अमित तिवारी और देवेश पथ सरिया को आमंत्रित किया गया था। इन युवा कवियों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से ऑनलाइन श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उल्लेख्य है कि अंचित एक रचनाकार होने के साथ-साथ अनुवादक भी हैं जबकि अमित तिवारी नई पीढ़ी के उदीयमान कवि  होने के अलावा गद्यलेखन और अनुवाद में सक्रिय हैं। देवेश पथ सरिया कवि होने के साथ-साथ खगोलशास्त्र में पीएचडी हैं जो ताइवान में पोस्ट डॉक्टरल अध्येता के रूप में कार्यरत हैं। 

इन युवा रचनाकारों की छंदमुक्त रचनाओं में जहाँ प्रेम और प्रकृति से सम्बंधित भावों की  विविधता रही है, वहीं इन्होंने अपनी रूपकात्मक भाषा में जीवन के यथार्थ को प्रस्तुत करने में जिस सहजता से अपनी कवि-सुलभ ऊर्जस्विता का परिचय दिया है--उसे रेखांकित किया जाना चाहिए। दूरस्थ विज्ञान से ली गई उपमाओं का निवेश देवेश ने अत्यंत कुशलतापूर्वक किया। देवेश ने प्रकृति के साथ अपनी सांठगांठ का रहस्योद्घाटन जितनी मासूमियत से किया है, उसे कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अस्तु, इन युवा कवियों में प्रेम का भाव आखिर तक अभिभावी रहा। दिव्या माथुर ने इन उदीयमान कवियों की रचनाओं की  तहेदिल से सराहना की।  

कार्यक्रम की प्रस्तोता तिथि दानी ने मंच का संचालन बड़ी सिद्धहस्तता से किया।

 

प्रस्तुति : मनोज मोक्षेंद्र

न्यूज़ सोर्स : wewitnessnews.com